बूढ़े ससुर जी का जबान लंड

हाय, मैं चंची हूँ गुजरात से और यह मेरे और मेरे ससुर की चुदाई कहानी हैं, मैं गुजरात के सूरत की हूँ लेकिन मेरी शादी बरोड़ा में हुई हैं. मेरा पति हितेन अमेरिका में रहता हैं और मैं यहाँ इंडिया में अपने सास और ससुर के पास. शायद में थोड़ी मोटी हूँ इसलिए हितेन मुझे यूएसए ले के नहीं जा रहा हैं. महीनों की प्यास के बाद मेरी चूत भी तो लंड मांगेंगी ना. और इसी वजह से मैं कभी मोमबत्ती तो कभी कच्चे केले से प्यास बूझा लेती हूँ. घर में नौकर भी नहीं के उसके साथ कुछ कर सकूँ. लेकिन शायद मेरी किस्मत में ससुर का मोटा लंड ही लिखा था. उस शाम सास के घर में ना होने का फायदा हम दोनों ने खूब उठाया और चुदाई का एक मस्त अनुभव लिया. तो चलो मैं आप को उस शाम की एक एक बात खुल के बताऊँ.

सासु माँ को किसी काम से पड़ोस के एक गाँव में जाना था. वो बाजूवाली जमना काकी के साथ रिक्शा में गई. वो रात को वापस आने वाली थी. मेरे ससुर बालकनी में बैठ के पेपर पढ़ रहे थे. मैंने सोचा की यही मौका हैं चूत की आग पे केले की ठंडक फेंकी जाएँ. मैंने किचन से सब्जी काटने के लिए ली और मैं अपने रूम में गई. सब्जी को मैंने साइड में रखा और अपने घाघरे को ऊँचा कर के पलंग पे बैठ गई. पेंटी को साइड में कर के मैं अपनी चूत को सहलाने लगी. अपनी चूत को फिर मैंने केले से छूना चालू किया. केले की डंडी को जैसे ही छेद पे रखा जैसे बदन में आग सी दौड़ उठी. केला जैसे एक मोटा लंड हो वैसे मैं उसे धीरे धीरे से छेद में डालने लगी. क्या मजा आ रहा था.

चूत को मजे देने के चक्कर में मैं एक चीज तो भूल ही गई थी. मेरे रूम के उपर एक खुला विंडो जैसा बना हैं, जो दिन में उजाले के लिए बनाया हुआ हैं. हड़बड़ी में मैंने ध्यान ही नहीं किया की वो मैंने बंध नहीं किया हैं. और जब मेरी नजर वहां पड़ी तो मैंने देखा की मेरा ससुर मुझे ऊपर से हस्तमैथुन करते हुए देख रहा हैं. जैसे ही मेरी और ससुर की नजर एक हुई मेरे बदन में ठंडी लहर दौड़ गई. ससुर सामने और चूत में केला. मैं डर गई और मैंने फट से केले को निकाल के घाघरे को निचे किया. मैं फट से किचन में भागी और जैसे कुछ हुआ ही ना हो वैसे चावल साफ करने लगी. तभी ससुर जी निचे आये और उन्होंने पेपर को फेंका साइड में. मुझे लगा की आज तो गई मैं, ससुर जी जरुर लड़ेंगे मुझ से.

लेकिन, बात कुछ और ही हुई. ससुर मेरे पास आये और बोले, “हितेन का फोन आता हैं तुम्हें?”

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मैं: कभी कभी कर लेते हैं महीने में एकाद बार.

ससुर जी: साला निकम्मा हो गया हैं अमरीका जा के.

मैं कुछ बोली नहीं और ससुर जी मेरे करीब आये और बोले, “देखों मैं जो कहने जा रहा हूँ उसमे मेरी कोई बुरी नियत नहीं हैं लेकिन तुम कब तक ऐसे काम चलओंगी.?”

मैं कुछ कहूँ उसके पहले हु ससुर ने कहा, “आ जाओ मैं तुम्हे आज खुश करता हूँ.”

पहले तो मैं कुछ भी समझी नहीं लेकिन जब ससुर जी ने मेरे पास आके मेरी चुंची पकड ली तो मैं समझी वो कैसे खुश करना चाहते हैं मुझे. मुझे भी थोड़ी नजाकत दिखानी ही थी. मैं जानबूझ के दो कदम पीछे खिसकी और बोली, “क्या कर रहे हो, मम्मी आ गई तो?”

“वो तो रात को आएँगी, और मैं तुम्हे केले गंदे करते हुए नहीं देख सकता. मैं भी 3 साल से भूखा हूँ और तुम भी प्यासी हों, घर की बात घर में ही निपट भी जायेंगी और बहार किसी को पता भी नहीं चलेंगा.” ससुर जी मुझे अपना लंड परोने के लिए बिलकुल अटेंशन में थे. उन्होंने अपनी धोती को साइड में किया और उनकी झुर्रियो वाली चमड़ी मुझे दिखी. मैंने ससुर जी की और देखा और एक पल के लिए सोचा की यह क्या मेरी भूख मिटायेंगा. लेकिन जैसे ही ससुर जी ने उसे पकड के उठाया मुझे पता चला की ससुर जी भी अपने ज़माने में बड़े लौंडीबाज रहे होंगे. लंड के ऊपर इस उम्र में भी एक भी बाल नहीं था जैसे की पोलिश कर के धोती पहनी हो. मैंने अपने हाथ से ससुर का लौड़ा पकड के जैसे ही हिलाया वो तन के तुरंत 8 इंच का हो गया. ऐसा मोटा लंड तो हितेन का भी नहीं हैं, उसका कुछ साढ़े 6 के करीब हैं. ससुर जी ने मेरे घाघरे को पकड़ा और उसे ऊपर की और उठाने लगे. मैं उनकी चूत मारने की बेताबी बखूबी समझ सकती थी. मैं घाघरा उनके हाथ से छुड़ा के उतारा और फिर ससुर के हाथ चोली की डोरी पे रख दिए. ससुर ने डोरी छोड़ी और मेरी ब्रा में झाँकने लगे. मैंने पीछे हाथ कर के जैसे ही ब्रा खोली मेरे 36D बोल्स बहार आ गए. ससुर ने अपने हाथ से उन्हें छू लिया जैसे की वो किसी नायाब चीज को हाथ से पकड रहे हों.

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मुझे भी पुरुष स्पर्श एक अरसे के बाद मिला था मेरी चूत पानी छोड़ने लगी. आह ससुर जी मेरी निपल्स को अपनी दो ऊँगली के बिच में रगड़ने लगे थे. तभी मैंने देखा की उनका मोटा लंड अब जोरदार तन चूका था जैसे की बरगद की डाल पे बैठा हुआ गिरगिट. मैंने अपने हाथ से उस मोटे लंड को पकड़ा और हिलाया. ससुर ने मुझे निचे बिठाया और बोले, “लाओ मुह खोलो बहुरानी तुम्हे पहले अमृत पिलाऊंगा फिर चुदाई करेंगे हम लोग.”

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ससुर का लंड मुहं में आते ही मैं उसे बेतहाशा चूमने लगी. ससुर जी भी अपनी आँखे बंध कर के मुझे मुहं में झटके देने लगे. ससुर का 5 इंच जितना लौड़ा मेरे मुहं में था और बाकी के 2 इंच को मैंने अपने हाथ में पकड रखा था. ससुर जी बिच बिच में लौड़े को बहार निकाल के अंदर पेल देते थे. ससुर के सुपाडे के छेद से अब कुछ बुँदे वीर्य की निकली और मेरे मुहं में भर गई. और फिर एकसाथ कुछ 50 बुँदे निकल के मुहं को चिकना करने लगी. ससुर का खारा खारा मूठ मैं एक ही घूंट पे पी गई. ससुर जी ने मुझे लंड से दूर किया और बोले, “चलो अब पलंग पे चलते हैं. केले की जगह तुम्हे असली मोटा लंड देना हैं मुझे.”

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बिस्तर पे आने से पहले ससुर ने अपने कुरते और बनियान को निकाल फेंका. मुझे उन्होंने टाँगे चौड़ी कर के सुला दिया. वो सीधे ही मेरे पेट के ऊपर अपनी जबान से चाटने लगे. फिर वो धीरे से निचे बढे और मेरी नाभि में अपनी जबान को डाल के उसे चाटने लगे. मैंने उनके बचे कुचे बालों को पकड के नोंच डाला. अब की तो वो तान में आके सीधे ही चूत के दरवाजे पे अपनी जबान को डाल बैठे. उनकी गरम गरम जबान मेरी चूत पे लगते हैं मैंने उन्हें कस के चूत पे दबोच लिया. ससुर ने मेरे बोल्स पकड लिए और उन्हें दबाते हुए वो मेरी चूत में अपनी जबान डालने लगे. वाऊ उनका मोटा लंड लेने के ख़याल से ही मेरी चूत पानी छोड़ चुकी थी, और अभी तो वो मेरी चूत को चाट रहे थे. उन्होंने जबान चूत के छेद में डाली और उसे चूसने लगे. फिर वो चूत के दाने के ऊपर उसे रगड़ के दाने को पानी पानी करने लगे.

ससुर ने मुहं को चूत से निकाला और बोले, “तुम्हारी चूत तो काफी गरम हैं, इसे लेने में तो बहुत मजा आयेंगा.”

इतना कह के वो फिर से चूत में डूब गए. वो जबान को चूत के अंदर तक डाल के चूसने लगे. मेरी तो बस हुई पड़ी थी ससुर के चूसने से ही. एक झटका लगा मेरे बदन को और मैंने अपनी गाढ़ी क्रीम निकाल दी. ससुर जी भी समझ गए की मैं क्यूँ ऐंठी थी. वो उठे और बोले, “टाँगे खोलो अपनी…!”

मैंने टाँगे फैलाई और उनका मोटा लंड मेरी चूत पे आ खड़ा हुआ. एक झटका और उनका आधा लंड चूत में था. मैंने हलकी सिसकी ली बहुत दिन के बाद चमड़े से जो चुद रही थी. ससुर ने मेरे कंधे पे चूम लिया और फिर एक झटका मारा. अब की उनका लंड मेरी चूत के आरपार था. क्या सुख था वो, शब्दों में बयान ही नहीं हो सकता वो. ससुर जी ने लंड को अंदर दबाया और फिर धीरे धीरे से उसे चूत की अंदर बहार करने लगे. मैंने कमर पर हाथ रख दिए उनकी और मैं उन्हें झटके देने में हेल्प करने लगी. ससुर का लौड़ा चूत को जोर जोर से चोदने लगा अब तो. 10 मिनिट ऐसे ही मेरी चूत लेने के बाद ससुर ने अपने लंड को बहार निकाला.

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वो मुझे उल्टा करते हुए बोले, “पीछे अनुभव करोंगी, मेरा मोटा लंड गांड को भी खुश कर देंगा तुम्हारी.”

मैं कुछ नहीं बोली, मैंने सिर्फ अपनी उंगलियों पे थूंक लिया और उसे गांड के काने पे मसलने लगी. ससुर जी जान गए की इसका मतलब क्या होता हैं. उन्होंने धीरे से अपना मोटा लंड गांड पे धरा और उसके ऊपर खुद भी थूंकने लगे. फिर धीरे से उन्होंने गांड के अदंर झटका दिया. मेरी तो जैसे की जान ही निकल पड़ी, उनका मोटा लंड गांड फाडू था जैसे. मैंने अपने दोनों हाथ से गांड को फैलाया और ससुर जी लंड की मार को धीरे धीरे बढाने लगे. मैंने आह आह कर के ससुर के गुदा मैथुन का मजा भी खूब लिया.

जब उन्होंने अपना मोटा लंड मेरी गांड में खाली किया तो मेरी चूत और गांड को जैसे एक संतृप्तता मिली. ससुर जी वही मेरे पलंग में लेट गए और उनका लंड फिर से झुर्रीयों वाला चूहा बन गया. मैंने ससुर के लंड को प्यार से देखा और घाघरा पहन के चाय बनाने चली गई. किचन में क्या सुझा की मैं चाय के बदले बादाम वाला दूध बना के वापस आई. शायद अब यही मेरे पति थे, कम से कम चुदवाने के लिए….!

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